राजा भोज निर्मित बडे ताल ने इसे मुल्क की सरहदो के भीतर सदियो से शेहरत बखश रखी है। परमारवशी विद्वान एव गुणी राजा भोज निर्मित विशाल तालाब अन्य अनेक राजाओ व सम्राटो की रक्तरंजित सफलताओ व स्मारको से अधिक सुदर व श्रेष्ठ सिद्ध हुआ।


यह मस्जिद एशिया की सबसे बडी मस्जिद मानी जाती है। इसके परिसर मे दिसम्बर के महीने मे विश्व मुस्लिम शाति सम्मेलन इस्तिमा का मेला भी लगता है। इस मेले मे दुनियाभर के मुसलमान एकत्रित होते है। इस विशाल मस्जिद के निर्माण के शुरूआत शाहजहॉ बेगम ने 1868 मे की थी। मस्जिद का निर्माण कार्य बेगम के इतकाल के बाद हुआ। वस्तु की दृष्टि से भी यह मस्जिद माहजबियो के लिए एक नायाब तोहफा हैं।


विश्व प्रसिद्ध वास्तुविदें चार्ल्स कुरियर द्वारा निर्मित यह भवन वास्तुकला कीᅠ दृष्टिᅠ सेᅠ अदभुत है ही, साथ ही यहॉ होने वाले सांस्कृतिक परिसर के रूप में ही हुआ था। इसे देश का सांस्कृतिक तीर्थ भी कहा जाता है। आदिवासी संस्कृति व रंगकर्म के शानदार वैभव का अद्‌भुत संग्रह भारत भवन भोपाल की सुदर झाील के किनारे बना है। इसी प्रकार आदिवासियों की झोपड़ियॉं उनके रहन-सहन का नमूना पेश करती हैं।


यह अभ्यारण्य बड़े तालाब के किनारे 445 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। यहां विभिन्न प्रकार के वन्य प्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में आसानी से देखा जा सकता है।


In the heart of the old city, the chowk is lined with old mosques and havelis, reminders of a bygone era. The shops in its narrow alleys are treasure troves of traditional Bhopal crafts: silver jewellery, exquisitely fashioned beadwork, embroidered and sequined velvet fashioned purses and cushion.


गुफा मदिर लाल घाटी के निकट स्थित है यहा प्रागऐतिहासिक गुफाए मे स्थित मदिर है। इसकी की खोज वर्ष 1949 मे स्वामी नारायण दास ने की थी। यहा विशाल सीढ़ी रूपी पटल के साथ श्री रामᅠलक्ष्मण सीता भगवान शकर देवी दुर्गा एव हनुमानजी की प्रतिमाए स्थित है।


यह विशाल ढॉचा पुराने शहर मे शाहजहांनाबाद के रास्ते मे स्थित है। इसे भारतीय स्वाधीनताᅠसघर्ष के शहीदो की स्मृति मे शहीद गेट के नाम से जाना जाता है।


यह शहर के सर्वश्रेष्ठ उद्यानो मे से एक है ।यहॉ गुलाबो की अद्वितिय सुंदरता देखते बनती है। यह भोपाल के पुराने किले के अवशेषों पर स्थित है यहां से बड़े तालाब का अत्यंत मनोहारी दृष्य सूर्यास्त के समय देखा जा सकता है।


यह स्थल भोपाल नगर से लगभग 7 किलोमीटर दूर भोपाल की सबसे ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। इसे मनुआ  भान की टेकरी के नाम से भी जाना जाता है। इस टेकरी पर जैन संत शिरोमणियों के चरण कमल की छवियॉं अंकित हैं और इसे जैन धर्म के एक महत्वपूर्ण तीर्थ का स्थान प्राप्त है।इस टेकरी के शीर्ष पर भारत धाम का विकास किया जा रहा है। जहां भारत की जानीमानी हस्तियो की मूर्तियां उनकी जीवनी के साथ स्थापित की जा रही हैं।


यह पार्क नगर निगम भोपाल एवं भारत जीवन बीमा निगम के संयुक्त प्रयास से स्थापित किया गया है। यहां वर्ष भर हजारों सैलानी आते हैं।