वर्ष 1907 मे अस्तित्व मे आई तत्कालीन भोपाल राज्य की प्रथम नगरीय निकाय सस्था मजलिस ए इतेजामिया थी। वर्ष1956 तक भोपाल की नगरीय निकाय के अतर्गत आने वाली सीमा बहुत डवेुनम छोटी थी कितु कालातर के वर्षाे मे इसमे आस पास के गावो को सम्मिलत करने का क्रम जारी रहा । वर्ष 1975 तक भोपाल की नगरीय निकाय सीमा बढकर 71.23 वर्ग किलोमीटर तक गयी ।


वर्तमान मे भोपाल नगर निगम के अतर्गत आने वाला कुल क्षेत्र 285 वर्ग किलोमीटर है। आरभ के वर्षाे मे भोपाल नगर निकाय का सचालक एक 20 सदस्यीय समिति करती थी, जिसके अध्यक्ष श्री अब्दुल करीम बाबू  मिया व उपाध्यक्ष श्री दीनदयाल थे। बाद के वर्षो मे भोपाल म्यूनिसिपल बोर्ड का स्तर बढाकर उसे म्यूनिसिपल कौसिल का दर्जा दिया गया और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को मुख्य प्रशासक नियुक्त किया जाने लगा वर्ष 1983 मे भोपाल म्यूनिसिपल कौसिल का दर्जा बढाकर इसे नगर निगम बताया गया । उस समय 6 वार्ड शामिल थे। भोपाल नगर निगम के प्रथम महापौर श्री  आर के बिसारिया निर्वाचित हुए।

वर्तमान स्थिति
  वार्डों की कुल संख्या    85
 पार्षदों की कुल संख्या    85